अविस्मरणीय रहेगा एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रोफेसर रोद्दम नरसिंहा का योगदान

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नई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर): भारत के प्रसिद्ध एयरोस्पेस वैज्ञानिक, पद्म विभूषण प्रोफेसर रोद्दम नरसिंहा का 87 वर्ष की उम्र में सोमवार 14 दिसंबर को बेंगलुरु के एम.एस. रमैया अस्पताल में निधन हो गया। वह अपने पीछे परिवार में एक बेटी और पत्नी को छोड़ गए हैं। प्रोफेसर नरसिंहा को पिछले हफ्ते ब्रेन हैमरेज हुआ था।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने प्रोफेसर रोद्दम नरसिंहा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि “भारत ने विज्ञान और नवाचार के अपने सबसे बड़े समर्थकों में से एक को खो दिया है। एयरोस्पेस में उल्लेखनीय कार्य और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा”

नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (एनएएल) के एक पूर्व निदेशक के रूप में उन्होंने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए), तेजस के डिजाइन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। तरल यांत्रिकी (Fluid Mechanics) की एक शाखा तरल गतिकी (Fluid Dynamics) पर उन्हें महारत प्राप्त थी। तरल यांत्रिकी का प्रयोग गतिशील तरलों (द्रव तथा गैस) की प्रकृति तथा उस पर लगने वाले बलों के आकलन के लिए किया जाता है।

वह जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) में डीएसटी ईयर-ऑफ-साइंस चेयर प्रोफेसर भी थे। इसके साथ-साथ ही, वह ‘प्रैट ऐंड व्हिटनी चेयर इन साइंस ऐंड इंजीनियरिंग के प्रमुख भी थे।

भारत के मशहूर वैज्ञानिक सतीश धवन के छात्र रह चुके नरसिंहा का शोध कार्य मुख्य रूप से एयरोस्पेस (वांतरिक्ष) तरल गतिकी पर केंद्रित है। वायु-मंडल में पटलीय प्रवाह (Laminar Flow) और अशांत प्रवाह (Turbulent Flow) के बीच स्थानांतरण पर उनका अध्ययन गहन और विस्तृत था। प्रघाती तरंगों (shock waves) की संरचना और तापमान के अन्य पहलुओं पर किए गए उनके अध्ययन को भी वैज्ञानिक समुदाय में बहुत अधिक सराहा गया है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड साइंसेज (NIAS) के निदेशक के रूप में प्रोफेसर नरसिंहा ने यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और अन्य निकायों के साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर कई प्रमुख संवाद शुरू किए। वह भारतीय अंतरिक्ष आयोग के सबसे लंबे समय तक सदस्य रहे। उन्होंने अपने इस पद से फरवरी, 2012 में इस्तीफा दे दिया था।

वर्ष 2013 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। भारत में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दिये जाने वाले सर्वोच्च शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, उन्हें वर्ष 2008 में ट्राइस्टे विज्ञान पुरस्कार भी मिला है।

प्रोफेसर नरसिंहा देश और दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों से दशकों तक जुड़े रहे। वह रॉयल सोसाइटी के फेलो और यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग तथा यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के फॉरेन एसोसिएट (Foreign Associate) रहे। यही नहीं, वह, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के विशिष्ट पूर्व छात्र थे।

भारत में उन्हें चर्चित एयरोस्पेस वैज्ञानिक के अलावा एक विख्यात शिक्षक और संस्थान निर्माता के तौर पर याद किया जाता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ माधवन नायर राजीवन ने उन्हें याद करते हुए कहा है कि “प्रोफेसर रोद्दम नरसिंहा, एक प्रतिभाशाली और उत्कृष्ट शिक्षक थे। उन्होंने वर्ष 2006 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और पृथ्वी आयोग के गठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। हम वर्ष 2012 में उन्हें पहला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देकर गौरन्वानवित अनुभव करते हैं। हम उनकी उपयोगी सलाह और मार्गदर्शन को याद करेंगे।”

डॉ राजीवन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि “जब हम मौजूदा समय में परिचालित मौसमी पूर्वानुमान मॉडल और कई अन्य चीजों पर काम कर रहे थे, तब मुझे व्यक्तिगत रूप से उनसे एक बेहतर सहयोग मिला। वर्ष 2008 में, उन्होंने मुझे भारतीय मौसम विभाग से इसरो जाने के लिए न केवल प्रेरित किया, बल्कि सहयोग भी किया। हम उनके प्रति सच्चे मन से आभारी हैं।”

ऐसे दिग्गज वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से कहा गया है कि प्रोफेसर रोद्दम नरसिंहा देश में एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रगति से संबंधित एक मजबूत स्तंभ थे। उनका निधन एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़े समुदाय के लिए एक बड़ा नुकसान है। डीआरडीओ के ट्विटर हैंडल पर कहा गया है कि “हम एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के उनके सपने को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे।” (इंडिया साइंस वायर)


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