ब्राह्यण अपने पुरुषार्थ का पाता है अपने पुरुषार्थ का ही पहनता है और अपने पुरुषार्थ का ही लेता भी है। अगर इसका ज्वलंत उदाहरण देखना हो तो हम सिंवाल भवन कि इस धर्मशाला को देख सकते हैं । मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि इस भवन का निर्माण ब्राह्मणों द्वारा हुआ जिसकी जितनी श्रद्धा थी उस सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों ने इसमें अपना अपना अनुदान दिया। इस सराहनीय कार्य के लिए मे एकत्रित हुए सारे विप्रजनो को सादर प्रणाम करता हूँ। उक्त बातें गणेङी प्रणवाश्रम के संत श्री निवृतिनाथ जी ने चूरू के घंटेल में बनी नव निर्मित सिवाल धर्मशाला का उद्घाटन करते हुए कही ।
विशिष्ठ अतिथि पूर्व सभापति विजय शर्मा, नवल सिंह राठौड़, जगदीश प्रसाद सिंवाल, महवीर प्रसाद सिंवाल, भ्रीकांत सिंवाल, बीरबलराम शास्त्री, मुरलीधर शर्मा थे। पूर्व सभा पति विजय शर्मा ने कहा कि इस गांव में एक धर्मशाला की अत्यंत आवश्यकता थी ये जन उपयोगी और सराहनीय है। सिवाल परिवार के जगदीश प्रसाद शर्मा ने धर्मशाला निर्माण की प्रेरणास्रोत रहे स्वर्गीय श्री गंगाधर सिंवाल को को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मैं पूरे गाँव का समस्त सिंवाल परिवार का आभारी हूँ जिन्होंने अपना योगदान अपना श्रमबल देकर इस धर्मशाला का।निर्माण करवाया। श्री महावीर प्रसाद सिंवाल ने कहा कि ये क्षण मेरे लिए अविस्मरणीय और अद्भुत है कि कभी छोटे भाई स्वर्गीय गंगाधर सिंवाल ने मुझे कहा था कि भाई साहब इस भवन की नींव 4 मंजिला है और मैं गुरु जी से आशीर्वाद चाहूँगा कि अभी ये धर्मशाला एक माले की है और ईश्वरीय कृपा रही तो आने वाले दिनों में इस भवन को हम चार माले तक पहुँचाएँगे।
इस अवसर पर सिंवाल परिवार के जगदीश शर्मं, डेडराज शर्मा, नेमीचंद शर्मा,दलीप शर्मा, भँवरलाल, ओमप्रकाश, इंद्रचंद शर्मा सहित हेमन्त सिंवाल बसंत सिंवाल नील सिंवाल लीनेश सिवाल। रवि सिंवाल उपस्थित थे । संजय कुमार गौरी शंकर ने सहयोगी भूमिका निभाई एवं कार्यक्रम का संचालन सांवरवमल शास्त्री एवं विजेन्द्र भाटी ने निभाई।