पुरुषों में भी बढ़ रही Infertility की समस्या: Risaa IVF ने Male Fertility Awareness को बताया जरूरी

Infertility issues rising among men too: Risaa IVF highlights the need for male fertility awareness.
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भारत में जब भी इनफर्टिलिटी की बात होती है, ज्यादातर ध्यान महिलाओं की सेहत पर ही जाता है। लेकिन सच यह है कि दुनियाभर में लगभग आधे इनफर्टिलिटी मामलों के पीछे पुरुषों से जुड़ी वजहें भी होती हैं। इसके बावजूद, समाज में यह सोच अब भी गहरी है कि बच्चा न होने की जिम्मेदारी सिर्फ महिला की है, जिसकी वजह से पुरुष अक्सर अपनी जांच कराने से भी हिचकिचाते हैं। इसी सोच को बदलने की ज़रूरत पर Risaa IVF लगातार ज़ोर देता आ रहा है।

बढ़ती समस्या के पीछे की वजहें

पिछले कुछ दशकों में पुरुषों में स्पर्म काउंट और स्पर्म क्वालिटी में लगातार गिरावट देखी गई है। इसके पीछे कई वजहें जिम्मेदार मानी जाती हैं:

  • बदलती जीवनशैली और लंबे समय तक बैठे रहने वाली नौकरियां
  • बढ़ता तनाव और अनियमित दिनचर्या
  • धूम्रपान और शराब का सेवन
  • मोटापा और असंतुलित खानपान
  • प्रदूषण और आसपास के माहौल में मौजूद हानिकारक तत्व
  • हार्मोन से जुड़ी समस्याएं और कुछ इन्फेक्शन

यही वजह है कि विशेषज्ञ अब पुरुषों को भी समय पर जांच कराने और अपनी सेहत को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं।

Risaa IVF का सफर और सोच

साल 2012 में शुरू हुआ Risaa IVF आजडॉ. रीटा बख्शी (चेयरपर्सन और सीनियर IVF स्पेशलिस्ट), जिनका फर्टिलिटी मेडिसिन में 35 से भी ज्यादा साल का अनुभव है, और उनकी विशेषज्ञों की टीम की अगुवाई में भारत, नेपाल और बांग्लादेश में 14 सेंटर्स के साथ काम कर रहा है।Risaa IVFमें इलाज की शुरुआत हमेशा कपल की पूरी जांच से होती है, जिसमें महिला के साथ-साथ पुरुष पार्टनर की भी उतनी ही अहमियत दी जाती है। डॉ. रीटा बख्शी और उनकी टीम का मानना है कि जब तक दोनों पार्टनर्स की सही जांच नहीं होती, तब तक समस्या की असल वजह समझना मुश्किल होता है।

जांच और जागरूकता क्यों ज़रूरी है

पुरुष फर्टिलिटी से जुड़ी जांच सुनने में जितनी मुश्किल लगती है, असल में उतनी ही सामान्य और आसान होती है। इसके बावजूद, झिझक और गलतफहमियों की वजह से कई पुरुष समय पर जांच नहीं कराते, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। Risaa IVF का मानना है कि जागरूकता बढ़ाकर ही इस झिझक को कम किया जा सकता है, इसलिए क्लिनिक में पुरुषों को भी इलाज की प्रक्रिया के बारे में खुलकर समझाया जाता है, ताकि वे बिना किसी संकोच के अपनी जांच करा सकें।

हर कपल के लिए सही इलाज

Risaa IVF में इलाज को कभी भी एक तय फॉर्मूले की तरह नहीं अपनाया जाता। जांच के नतीजों के आधार पर ही तय किया जाता है कि कपल को लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी जाए, दवाइयों से इलाज हो, या IVF-ICSI जैसी तकनीक की ज़रूरत है। इसके साथ ही, इलाज के खर्च को लेकर EMI जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं, ताकि पैसों की चिंता किसी कपल के इलाज के रास्ते में बाधा न बने।

बदलाव की दिशा में एक ज़रूरी कदम

पुरुष फर्टिलिटी को लेकर खुलकर बात करना और समय पर जांच कराना, दोनों ही पैरेंटहुड के सफर को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। Risaa IVF का यह मानना है कि जब तक पुरुष और महिला, दोनों की सेहत को बराबर अहमियत नहीं दी जाएगी, तब तक इनफर्टिलिटी को लेकर बनी सामाजिक गलतफहमियां पूरी तरह दूर नहीं हो पाएंगी।


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